क्यूँँ सब इतना हसीं है, नए साल पर कुछ नया तो नहीं है, नए साल पर फिर तमन्ना मुहब्बत की करने लगे? फिर से तुम को यक़ीं है नए साल पर
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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या तो हासिल हो बस मुझे वो शख़्स या तो सब पर हराम हो जाए
Yamir Ahsan
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वो मुझ को जब नज़रअंदाज़ करती है ये ख़ामोशी बहुत आवाज़ करती है
Yamir Ahsan
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मेरे लब से हटा के इक सिगरेट अपनी आदत लगा गया कोई
Yamir Ahsan
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पंखा दीवार और खिड़कियों पर नज़र जाती है रात यूँँ ही गुज़रनी थी यूँँ ही गुज़र जाती है इश्क़ ने कौन सी तार जाने कहाँ जोड़ दी दिल कभी भरने लग जाए तो आँख भर जाती है
Yamir Ahsan
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ले जाऊँ सफ़र ये सितारों से आगे मगर तुम बढ़ो तो इशारों से आगे
Yamir Ahsan
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