लब पे इक नाम हमेशा की तरह और क्या काम हमेशा की तरह
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हर एक बात ज़बाँ से कही नहीं जाती जो चुपके बैठे हैं कुछ उन की बात भी समझो
Mahshar Inayati
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चले भी आओ मिरे जीते-जी अब इतना भी न इंतिज़ार बढ़ाओ कि नींद आ जाए
Mahshar Inayati
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क़सम जब उस ने खाई हम ने ए'तिबार कर लिया ज़रा सी देर ज़िन्दगी को ख़ुश-गवार कर लिया
Mahshar Inayati
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न ग़ैर ही मुझे समझो न दोस्त ही समझो मिरे लिए ये बहुत है कि आदमी समझो
Mahshar Inayati
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उन का ग़म उन का तसव्वुर उन की याद कट रही है ज़िन्दगी आराम से
Mahshar Inayati
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