न ग़ैर ही मुझे समझो न दोस्त ही समझो मिरे लिए ये बहुत है कि आदमी समझो
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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चले भी आओ मिरे जीते-जी अब इतना भी न इंतिज़ार बढ़ाओ कि नींद आ जाए
Mahshar Inayati
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हर एक बात ज़बाँ से कही नहीं जाती जो चुपके बैठे हैं कुछ उन की बात भी समझो
Mahshar Inayati
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क़सम जब उस ने खाई हम ने ए'तिबार कर लिया ज़रा सी देर ज़िन्दगी को ख़ुश-गवार कर लिया
Mahshar Inayati
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लब पे इक नाम हमेशा की तरह और क्या काम हमेशा की तरह
Mahshar Inayati
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उन का ग़म उन का तसव्वुर उन की याद कट रही है ज़िन्दगी आराम से
Mahshar Inayati
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