लहू भी पसीना मिरे जैसे का तो मिरे जैसे यूँँही बहाते चलेंगे
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कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं यूँँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं
Anjum Rehbar
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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
Mirza Ghalib
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उदासी जैसे कि उस के बदन का हिस्सा है अधूरा लगता है वो शख़्स अगर उदास न हो
Vikram Sharma
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अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई
Gopaldas Neeraj
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ज़िंदगी यूँँही बहुत कम है मोहब्बत के लिए रूठ कर वक़्त गँवाने की ज़रूरत क्या है
Unknown
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ज़रा सी बात को ऐसे कहेगी हो जाऊँगा बहन हैरान जैसे
Raushan miyaa'n
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ज़रा चुप हुआ तो सुनाई दिया हमें दिल-जलों ने जला ही दिया
Raushan miyaa'n
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वो मिरे दीद को तरसते क्यूँँ ऐब गर उन को ये पता होता
Raushan miyaa'n
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उठ चले सब बे-ज़बाँ बैठे रहे हम सजा महफ़िल वहाँ बैठे रहे टालना सीखा नहीं माँ का कहा माँ ने बैठाया जहाँ बैठे रहे
Raushan miyaa'n
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उस ने कहना सुनना छोड़ दिया आसानी से पीछा छोड़ दिया
Raushan miyaa'n
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