उठ चले सब बे-ज़बाँ बैठे रहे हम सजा महफ़िल वहाँ बैठे रहे टालना सीखा नहीं माँ का कहा माँ ने बैठाया जहाँ बैठे रहे
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
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ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है हमारा शे'र भी सुनने न आएँ हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है
Ali Zaryoun
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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
Sahir Ludhianvi
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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
Jigar Moradabadi
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ये हक़ीक़त है हक़ीक़त बातें पड़ती है गाल पे रहपट कि तरह
Raushan miyaa'n
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ज़रा चुप हुआ तो सुनाई दिया हमें दिल-जलों ने जला ही दिया
Raushan miyaa'n
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तुम अलग हो यार उन सब बाक़ियों से इश्क़ तुम से है था मतलब बाक़ियों से तेरे दीवाने का आशिक़ का तिरे यूँँ मुख़्तलिफ़ क्यूँँ फ़ैसला रब बाक़ियों से
Raushan miyaa'n
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पहन हिजाब कहूँ क्या हिजाब में लागे हिसाब आग लगे फिर किताब में लागे बदल गई है तिरी चाल क्या हुआ था शब पिघल गया था लगे शे'र ख़्वाब में लागे
Raushan miyaa'n
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पि यूँँ हराम कि तो फिर हराम अच्छा है वगरना कौन सा मुफ़्ती को जाम अच्छा है
Raushan miyaa'n
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