लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की यकुम मई को भी मज़दूरों ने मज़दूरी की
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ
Umair Najmi
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दानिस्ता मुझ आवारा से टकरा के ये दुनिया कहती है कि अंधे हो दिखाई नहीं देता
Afzal Khan
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ये कह दिया है मिरे आँसुओं ने तंग आ कर हमें ब-वक़्त-ए-ज़रूरत निकालिए साहब
Afzal Khan
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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे
Afzal Khan
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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना
Afzal Khan
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हमारे साँस भी ले कर न बच सके अफ़ज़ल ये ख़ाक-दान में दम तोड़ते हुए सिगरेट
Afzal Khan
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