मानो या मत मानो लेकिन सच में इक मह-पारा हो तुम
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये जगह उतनी भी नहीं बदली जितनी जानाँ बदल गई हो तुम
ABhishek Parashar
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वो मुझे तंग कर नहीं सकते उन को ये बात तंग करती है
ABhishek Parashar
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रात को थक के सोता है दिन और दिन में आराम रात करती है
ABhishek Parashar
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ये सादगी ये हुस्न ये लहजा तेरा कैसे मेरा दिल तेरा दीवाना न हो
ABhishek Parashar
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मैं भी तन्हाई का मारा हुआ हूँ उसे भी चाहिए हमराज़ कोई
ABhishek Parashar
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