मैं भी तन्हाई का मारा हुआ हूँ उसे भी चाहिए हमराज़ कोई
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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ज़हरस इतने तो नहीं मरते लोग मरते हैं जितने तानों से
ABhishek Parashar
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ज़िंदगी से चली गई लेकिन वो मेरे ज़ेहन से नहीं जाती
ABhishek Parashar
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उस के कहने से सुधर सकता हूँ डरती है जो मुझे कुछ कहने से
ABhishek Parashar
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मुझ सेे ये हिज्र नहीं कटता है तुम मेरे ख़्वाब में आ सकती हो
ABhishek Parashar
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ये कहानी भी मुकम्मल हो न पाई दोस्तो इस कहानी में भी उस का दिल कोई और ले गया
ABhishek Parashar
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