मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं तेरे फ़िराक़ में यूँँ सुबह-ओ-शाम करते हैं
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
136 likes
बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
141 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
More from Faiz Ahmad Faiz
न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं
Faiz Ahmad Faiz
26 likes
उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है, जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
Faiz Ahmad Faiz
20 likes
बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़बाँ अब तक तेरी है
Faiz Ahmad Faiz
0 likes
इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए
Faiz Ahmad Faiz
30 likes
कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं, सर भी बहुत चलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे
Faiz Ahmad Faiz
28 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Faiz Ahmad Faiz.
Similar Moods
More moods that pair well with Faiz Ahmad Faiz's sher.







