मैं आग इश्क़ की फिर से बुझा के आई हूँ मैं जानती हूँ किसी को बचा के आई हूँ गले लगा के मुझे रो रही थी तन्हाई सो मैं भी आँख से आँसू बहा के आई हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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तोड़ देता वो तन्हाई में दम मगर चाँद आया फ़क़त तीरगी के लिए
Ritika reet
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याद उस को इस क़दर मैं ने किया उम्र भर उस में सफ़र मैं ने किया कोई तो आ कर के बैठेगा यहाँ सोच कर ख़स्ता जिगर मैं ने किया
Ritika reet
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तसव्वुर किसी का चला जाएगा फिर यही सोच पलके उठाना नहीं है
Ritika reet
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आपसे है सवाल मेरा अब कौन रक्खे ख़याल मेरा अब तू नहीं है अगर तो फिर तुझ सेा कौन पूछेगा हाल मेरा अब
Ritika reet
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सदा बे-दिली ही मिली तो हुआ क्या हमें भी मगर मुस्कुराना नहीं है
Ritika reet
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