तोड़ देता वो तन्हाई में दम मगर चाँद आया फ़क़त तीरगी के लिए
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हमें बे-दिली ये गँवाना नहीं है चराग़ों को फिर से जलाना नहीं है
Ritika reet
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याद उस को इस क़दर मैं ने किया उम्र भर उस में सफ़र मैं ने किया कोई तो आ कर के बैठेगा यहाँ सोच कर ख़स्ता जिगर मैं ने किया
Ritika reet
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सदा बे-दिली ही मिली तो हुआ क्या हमें भी मगर मुस्कुराना नहीं है
Ritika reet
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आँख से टपका था रेज़ा दर्द का हाथ में मेरे था तारा दर्द का ख़ुशनसीबी समझो या फिर हादसा मैं ने कल देखा था चेहरा दर्द का
Ritika reet
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यूँँही न गुलिस्तान बयाबान हुआ है लगता है यहाँ से कोई तूफ़ान गया है फिर आपने माँगी है ख़ुशी मेरी ख़ुदा से फिर आपने कितना मेरा नुक़्सान किया है
Ritika reet
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