सदा बे-दिली ही मिली तो हुआ क्या हमें भी मगर मुस्कुराना नहीं है
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हमें बे-दिली ये गँवाना नहीं है चराग़ों को फिर से जलाना नहीं है
Ritika reet
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तोड़ देता वो तन्हाई में दम मगर चाँद आया फ़क़त तीरगी के लिए
Ritika reet
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याद उस को इस क़दर मैं ने किया उम्र भर उस में सफ़र मैं ने किया कोई तो आ कर के बैठेगा यहाँ सोच कर ख़स्ता जिगर मैं ने किया
Ritika reet
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आँख से टपका था रेज़ा दर्द का हाथ में मेरे था तारा दर्द का ख़ुशनसीबी समझो या फिर हादसा मैं ने कल देखा था चेहरा दर्द का
Ritika reet
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यूँँही न गुलिस्तान बयाबान हुआ है लगता है यहाँ से कोई तूफ़ान गया है फिर आपने माँगी है ख़ुशी मेरी ख़ुदा से फिर आपने कितना मेरा नुक़्सान किया है
Ritika reet
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