मैं क्या करूँँ मेरी बेगम सुहाग ढूँढ़े है मेरे बुझे हुए चूल्हे में आग ढूँढ़े है वो दिन गए कि उड़ाते थे फ़ाख़्ताएँ हम सपेरा चूहे के इक बिल में नाग ढूँढ़े है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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न तेरे आने से मेरा शबाब लौटा है न दिल लगाने से मेरा शबाब लौटा है क़सम ख़ुदा की बताता हूँ राज़ ये तुम को नहारी खाने से मेरा शबाब लौटा है
Paplu Lucknawi
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मुत्तकी हो गया ख़ौफ़-ए-बीवी से मैं अब इबादत का सौदा मेरे सर में है मैं ने दाढ़ी बढ़ाई तो कहने लगी अब कमीना ये हूरों के चक्कर में है
Paplu Lucknawi
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बच्चों तुम्हीं बताओ कि मईया कहाँ गई रस्ते में छोड़कर ये सुरईया कहाँ गई इन रक्षकों के ख़ौफ़ से घर में छुपा हूँ मैं पूछेंगे ये ज़रूर कि गईया कहाँ गई
Paplu Lucknawi
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मुझे भी अपनी क़िस्मत पर हमेशा नाज़ रहता है सुना है ख़्वाहिशें उन की भी शर्मिंदा नहीं रहती सुना है वो भी अब तक खाए बैठी हैं कई शौहर बहुत दिन तक मेरी भी बीवियाँ ज़िंदा नहीं रहती
Paplu Lucknawi
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खद्दर पहन के बेच रहा था शराब वो देखा मुझे तो हाथ में झंडा उठा लिया मैं भी कोई गँवार सिपाही न था जनाब मैं ने भी जाम फेंक के डंडा उठा लिया
Paplu Lucknawi
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