मैं मेरा इश्क़ मेरी आशिक़ी मेरी वफ़ा सब कुछ मेरा गुमनाम ठहरा न मैं मजनूँ न मैं राँझा न मैं फ़रहाद फिर क्यूँ याद रक्खे कोई मुझ को
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ये वजूद-ए-इश्क़ तुझ को रब मिटाना ही पड़ेगा हुस्न के हाथों वफ़ा होता है रुस्वा देख हर पल
A R Sahil "Aleeg"
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ये पहेली अज़ल से उलझी है है बुरा हुस्न या है इश्क़ बुरा
A R Sahil "Aleeg"
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उस के झूठे इश्क़ को कर लेता मैं तस्लीम लेकिन उस का लहजा और इरादा बे-वफ़ाई से भरा था
A R Sahil "Aleeg"
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निकलने को न जाने दिल से जाँ क्या क्या नहीं निकला नहीं निकला तो बस इक इश्क़ और शहर-ए-मुज़फ़्फ़रपुर
A R Sahil "Aleeg"
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वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर गेसुओं के क़फ़स में मर जाए ये तमन्ना है एक आशिक़ की इश्क़ की दस्तरस में मर जाए
A R Sahil "Aleeg"
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