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मैं नहीं चाहता हूँ आप सुख़न-फ़हमी हों दोस्त मैं नहीं चाहता हूँ आप को तन्हा करें आप

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ये मिरी ज़िंदगी ये कुछ भी नहीं बोझ है मुझ को ढो रहा हूँ मैं

Chandan Sharma

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ज़िंदगी बे-ख़बर रही मुझ से ऐसे की ज़िंदगी बसर मैं ने अपने अंदर तुझे बसाया और ढूँढ़ा फिर ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने

Chandan Sharma

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तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जान मैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खा तेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्त सो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा

Chandan Sharma

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मेरे ही साथ रहना था तुम को मुझ से ही दूर जा रही हो तुम रात, दरिया, ये चाँद, तन्हाई जाँ बहुत याद आ रही हो तुम

Chandan Sharma

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मुझ पे यूँँ ऐतिबार क्यूँ था कहो आप को मुझ से प्यार क्यूँ था कहो दिल मुहल्ले में उम्र ढलने तक किसी का इंतिजा़र क्यूँ था कहो

Chandan Sharma

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