main 'zafar' ta-zindagi bikta raha pardes mein apni ghar-wali ko ek kangan dilane ke liye
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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उस पे पत्थर खा के क्या बीती 'ज़फ़र' देखेगा कौन फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्म-ए-शजर देखेगा कौन
Zafar Gorakhpuri
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किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ तो शायद ये समझ पाओ ख़ुदा ऐसा भी होता है
Zafar Gorakhpuri
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पत्थर कहा गया कभी शीशा कहा गया दिल जैसी एक चीज़ को क्या क्या कहा गया
Zafar Gorakhpuri
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देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए
Zafar Gorakhpuri
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फ़ुर्सत मिले तो पूछ कभी उन का हाल भी जो लोग जी रहे हैं तेरे प्यार के बग़ैर
Zafar Gorakhpuri
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