मेरा ग़ुस्सा है मेरी शा'इरी में तरन्नुम में कहाँ अच्छा लगेगा
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम देर से सोते हो अफ़सर बन नहीं सकते अगर तुम वक़्त पे सोते हो शाइ'र बन नहीं सकते
Tanoj Dadhich
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आगे चल कर जिस सेे शादी करनी हो पहले दिन से झूठ नहीं कहते उस सेे
Tanoj Dadhich
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तुम्हारे ख़त को जलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है ये दिल बाहर निकलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है तुम्हारा फ़ैसला है पास रुकना या नहीं रुकना मेरी क़िस्मत बदलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
Tanoj Dadhich
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पहुँचते ही नहीं हैं शे'र उन तक हमें मशहूर होना पड़ रहा है
Tanoj Dadhich
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आ रही है जो बहू सीधी रहे माँ चाहती जा रही बेटी मगर चालाक होनी चाहिए
Tanoj Dadhich
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