मिरे किरदार का मरना ही शायद कहानी की ज़रूरत बन गया था
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है
Sandeep Thakur
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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जिस को ख़ुद मैं ने भी अपनी रूह का इरफ़ाँ समझा था वो तो शायद मेरे प्यासे होंटों की शैतानी थी
Jaun Elia
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कुल जोड़ घटाकर जो ये संसार का दुख है उतना तो मिरे इक दिल-ए-बेज़ार का दुख है शाइ'र हैं तो दुनिया से अलग थोड़ी हैं लोगों सबकी ही तरह हमपे भी घर बार का दुख है
Ashutosh Vdyarthi
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यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं कहानी इतनी अच्छी जा रही है
Shriyansh Qaabiz
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वो बिल्कुल फूल सी बच्ची है यारो सड़क पर फूल लेकिन बेचती है
Shriyansh Qaabiz
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कितना भी ज़ोर दूँ मगर आता नहीं है याद किस ने बताया था मुझे के खो गया हूँ मैं
Shriyansh Qaabiz
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इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
Shriyansh Qaabiz
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तुम सेे बातें कर के ये तो जान गया तुम को खोने वाले सब पछताएँगे
Shriyansh Qaabiz
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