मिरे सब यार शाइ'र हैं ज़बाँ पे बात ग़ज़लों की गरीबों को मिले रोटी नहीं है चाह महलों की
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ज़िंदगी तो बात है ऐसी अनोखी जानना ही गूढ़ होता जा रहा है
Vikalp Mishra Anuj
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मुसीबत में जो हो साथी यही पहचान अपनों की
Vikalp Mishra Anuj
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सिर्फ़ इक ही बात जो सच है जहाँ में कर के आती यार है वो भी बहाना
Vikalp Mishra Anuj
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कुशादा जितनी उतनी ही बड़ी चालक है दुनिया ज़रा सी ठोकरें खा लो अकेला छोड़ देती है
Vikalp Mishra Anuj
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क्या करना है क्या करता हूँ इस दुविधा में मैं उलझा हूँ बिल्कुल मेरे जैसे हो तुम मुझ को मैं अच्छा लगता हूँ
Vikalp Mishra Anuj
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