मेरे तावीज़ में जो काग़ज़ है उस पे लिक्खा है मुहब्बत करना
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ये वही हूँ मैं वो ही हारा हुआ फिर वही दिन है वो गुज़ारा हुआ कैसे अपनी तरफ़ चला आया मैं किसी और का पुकारा हुआ
Swapnil Tiwari
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वो जो पागल था अब वो कैसा है ऐसे वो पूछता है हाल मेरा
Swapnil Tiwari
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जलते दिए सा इक बोसा रख कर उस ने चमक बढ़ा दी है मेरी पेशानी की
Swapnil Tiwari
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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हर एक नींद को परख रहा हूँ मैं तुम्हारे एक ख़्वाब का जला हुआ
Swapnil Tiwari
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