मिरी गली से गुज़रता हुआ कोई मासूम हरम को देख के भी हाथ जोड़ लेता है
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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जल रही है आख़िरी चिंगारी जब तक राख में आप उस को राख कह कर आग मत भड़काइए
ADITYA TIWARI
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न इतनी पास है मंज़िल कि तय करें पैदल न इतनी दूर कि कोई सवारी मिल जाए
ADITYA TIWARI
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दोनों पहलू के ग़म तब सुनूँगा मैं फिर गर मैं सुनने लगा सब सुनूँगा मैं फिर
ADITYA TIWARI
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मेरे हालात पे दुनिया को तरस आता है बस मिरी आह को मैं ही नहीं सुन पाता हूँ
ADITYA TIWARI
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मिलते हैं उस ने भी कहा रस्मन हम ने भी कह दिया कि देखेंगे
ADITYA TIWARI
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