न इतनी पास है मंज़िल कि तय करें पैदल न इतनी दूर कि कोई सवारी मिल जाए
Related Sher
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
265 likes
ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
117 likes
मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
152 likes
मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
134 likes
More from ADITYA TIWARI
मिरी गली से गुज़रता हुआ कोई मासूम हरम को देख के भी हाथ जोड़ लेता है
ADITYA TIWARI
0 likes
दोनों पहलू के ग़म तब सुनूँगा मैं फिर गर मैं सुनने लगा सब सुनूँगा मैं फिर
ADITYA TIWARI
0 likes
मेरे हालात पे दुनिया को तरस आता है बस मिरी आह को मैं ही नहीं सुन पाता हूँ
ADITYA TIWARI
0 likes
दिए बना तो रहा हूँ मगर दुखी हूँ मैं दिए के होने का मतलब है रात फिर होगी
ADITYA TIWARI
0 likes
मिलते हैं उस ने भी कहा रस्मन हम ने भी कह दिया कि देखेंगे
ADITYA TIWARI
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ADITYA TIWARI.
Similar Moods
More moods that pair well with ADITYA TIWARI's sher.







