जल रही है आख़िरी चिंगारी जब तक राख में आप उस को राख कह कर आग मत भड़काइए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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न इतनी पास है मंज़िल कि तय करें पैदल न इतनी दूर कि कोई सवारी मिल जाए
ADITYA TIWARI
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मिरी गली से गुज़रता हुआ कोई मासूम हरम को देख के भी हाथ जोड़ लेता है
ADITYA TIWARI
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मेरे हालात पे दुनिया को तरस आता है बस मिरी आह को मैं ही नहीं सुन पाता हूँ
ADITYA TIWARI
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दिए बना तो रहा हूँ मगर दुखी हूँ मैं दिए के होने का मतलब है रात फिर होगी
ADITYA TIWARI
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दोनों पहलू के ग़म तब सुनूँगा मैं फिर गर मैं सुनने लगा सब सुनूँगा मैं फिर
ADITYA TIWARI
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