मिल गई है आप को तो पीर की पगड़ी भी लेकिन मेरे हिस्से में मगर मेरी ख़लीफ़त भी नहीं है
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काश वो रास्ते में मिल जाए मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
Fahmi Badayuni
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मैं तो ये सोच भी नहीं सकता तेरे बिन तो मैं जी नहीं सकता हाथ में है तिरे लबों का जाम अपने होंटो को सी नहीं सकता
Ali Nazim Adam
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तिरी डोली उठेगी तो जनाज़ा तो उठेगा ही चलो मैं भी कफ़न पहनूँ चलो ख़ुद को सजा लो तुम
Ali Nazim Adam
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नंगे तो सब इक जैसे लगते हैं कपड़ो मैं तो सब अच्छे लगते हैं साथ हमारे तुम प्यारे लगते हो साथ तुम्हारे हम कैसे लगते हैं
Ali Nazim Adam
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जहाँ वाले चुरा लेंगे तुम्हें मुझ सेे मिरी लैला किसी महफ़ूज़ ख़े में में ज़रा ख़ुद को छुपा लो तुम
Ali Nazim Adam
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लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की जिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ा उस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की
Ali Nazim Adam
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