sherKuch Alfaaz

तिरी डोली उठेगी तो जनाज़ा तो उठेगा ही चलो मैं भी कफ़न पहनूँ चलो ख़ुद को सजा लो तुम

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मैं तो ये सोच भी नहीं सकता तेरे बिन तो मैं जी नहीं सकता हाथ में है तिरे लबों का जाम अपने होंटो को सी नहीं सकता

Ali Nazim Adam

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यार मुझ को आपसे अब तो मुहब्बत भी नहीं है और मुझ को मेरे घर से ये इजाज़त भी नहीं है आप तो कर भी नहीं सकते दुआ हक़ में हमारे मत करो अब आप को कोई ज़रूरत भी नहीं है

Ali Nazim Adam

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लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की जिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ा उस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की

Ali Nazim Adam

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नंगे तो सब इक जैसे लगते हैं कपड़ो मैं तो सब अच्छे लगते हैं साथ हमारे तुम प्यारे लगते हो साथ तुम्हारे हम कैसे लगते हैं

Ali Nazim Adam

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मैं कभी भूल सकता नहीं आप को मौत को भी कोई भूलता है भला

Ali Nazim Adam

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