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लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की जिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ा उस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की

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यार मुझ को आपसे अब तो मुहब्बत भी नहीं है और मुझ को मेरे घर से ये इजाज़त भी नहीं है आप तो कर भी नहीं सकते दुआ हक़ में हमारे मत करो अब आप को कोई ज़रूरत भी नहीं है

Ali Nazim Adam

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रहा नहीं वो शख़्स अब यहाँ ज़मीन के लिए बनाया ही गया था उस को आस्तीन के लिए

Ali Nazim Adam

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वो मेरे पास से वापस अगर आ कर नहीं जाता तो मेरी आँख से उस का कभी पैकर नहीं जाता जो उस के पास से होकर गुज़र जाए कभी तो फिर बसर कोई भी हो अपने सलामत घर नहीं जाता

Ali Nazim Adam

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तिरी डोली उठेगी तो जनाज़ा तो उठेगा ही चलो मैं भी कफ़न पहनूँ चलो ख़ुद को सजा लो तुम

Ali Nazim Adam

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मैं तो ये सोच भी नहीं सकता तेरे बिन तो मैं जी नहीं सकता हाथ में है तिरे लबों का जाम अपने होंटो को सी नहीं सकता

Ali Nazim Adam

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