मिल गई ख़ैरात में उस को ज़रा सी रौशनी क्या वो समझने ये लगा है जेब में सूरज पड़ा है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये तो हम सेे आज़ादी की अर्ज़ी है तुम ख़ुद गर्ज़ नहीं थे ये ख़ुद गर्ज़ी है चाहत तो तुम समझ रही हो अच्छे से आगे मेरी जान तुम्हारी मर्ज़ी है
Akash Gagan Anjaan
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ज़रा सा भर गए क्या देखिए ना घड़े झगड़ा नदी से कर रहे हैं
Akash Gagan Anjaan
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उस की चौखट को चू में बिन अपना तीर्थ अधूरा है औरों की ख़ातिर बस चारों धाम बहुत होते होंगे
Akash Gagan Anjaan
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इश्क़ वगैरह करते करते इस हद तक आ पहुँचे हम थोड़ा और किया जाए तो पीएचडी हो जाएगी
Akash Gagan Anjaan
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कुछ ख़्वाब कभी पूरे नहीं होने यहाँ पर बोझिल हैं अगर पलकें तो सामान उतारो तुम जैसों को चाहा था कभी मैं ने ग़ज़ब है आ कर के किसी रोज़ ये एहसान उतारो
Akash Gagan Anjaan
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