मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन ईद ऐसी बहार लाई है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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ये तुम्हें क्या हुआ है क्या ग़म है तुम बताओ तो आँख क्यूँ नम है एक ही घूँट में शिफ़ा होगी पीके देखो ये आब-ए-ज़मज़म है
Zafar Siddqui
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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सब हमीं पर ही लाज़मी है क्या तुम भी वा'दा कभी करो कोई
Zafar Siddqui
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तुम यक़ीं मत मशीन पर रखना पाँव अपने ज़मीन पर रखना वो ज़फ़र जाल में फँसाएगा तुम नज़र उस हसीन पर रखना
Zafar Siddqui
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