meri zindagi to guzri tere hijr ke sahaare meri maut ko bhi pyare koi chahiye bahana
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जुदा हुए हैं बहुत लोग एक तुम भी सही अब इतनी बात पे क्या ज़िंदगी हराम करें
Nasir Kazmi
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ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी
Yasir Khan
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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यक़ीन कर वो तिरे पास लौट आएगा जब उस का उठने लगेगा यक़ीन लोगों से
Varun Anand
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
Jigar Moradabadi
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जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है
Jigar Moradabadi
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तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
Jigar Moradabadi
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सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़ हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती
Jigar Moradabadi
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दोनों हाथों से लूटती है हमें कितनी ज़ालिम है तेरी अँगड़ाई
Jigar Moradabadi
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