मोर्चा हम ने सँभाला है ये भी इक वहम था खेल हर दिन ही पलट देता खिलाड़ी इक नया
Related Sher
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
129 likes
दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
124 likes
रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
100 likes
मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
100 likes
बे-दिली क्या यूँँही दिन गुज़र जाएँगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
Jaun Elia
105 likes
More from "Dharam" Barot
वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
1 likes
पिता बच्चों की हर विश पूरी करने में लगा है गगन जैसी भी ख़्वाहिश पूरी करने में लगा है
"Dharam" Barot
1 likes
पुल पे से ये कश्तियाँ मैं देखता हूँ थी ज़रूरत जो कभी वो शौक है अब
"Dharam" Barot
1 likes
हो गया है आँख से ओझल बताना तो पड़ेगा पास जा कर प्यार चुपके से जताना तो पड़ेगा हाँ युधिष्ठिर ने सिखाया युद्ध में तो बस यहीं है तू न कहना झूठ फिर भी सच छुपाना तो पड़ेगा
"Dharam" Barot
1 likes
रूह तो बस बात करती है तुम्हारी बात करते हो ख़ुदा की मर्ज़ी की क्यूँ
"Dharam" Barot
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on "Dharam" Barot.
Similar Moods
More moods that pair well with "Dharam" Barot's sher.







