पुल पे से ये कश्तियाँ मैं देखता हूँ थी ज़रूरत जो कभी वो शौक है अब
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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वो ख़ुद को शे'र माने बैठा देखो बताओ ज़िन्दगी सर्कस है उस को
"Dharam" Barot
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क़ैद कर के मत करे आज़ाद मुझ को अब हुनर बाक़ी नहीं उड़ने का मुझ में
"Dharam" Barot
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न रामायण का मक़्सद राम को सब को बताना था हाँ रामायण का मक़्सद राम हर घर में बनाना था
"Dharam" Barot
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नए साल पर भी है इतनी उदासी नहीं जा रहा घर कमाई है भारी
"Dharam" Barot
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पिता बच्चों की हर विश पूरी करने में लगा है गगन जैसी भी ख़्वाहिश पूरी करने में लगा है
"Dharam" Barot
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