मुहब्बत का मुहब्बत से कोई जब नाम लेता है किसी का हो गया है वो यही पैग़ाम देता है
Related Sher
शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
839 likes
बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
751 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
More from Zeeshan kaavish
उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो
Zeeshan kaavish
1 likes
तुझ सेे बिछडूँगा तो पागल नहीं होने वाला हाँ मगर सच है मुकम्मल नहीं होने वाला कोई नुक़सान नहीं होगा उसे पाने में वो खरा सोना है पीतल नहीं होने वाला
Zeeshan kaavish
1 likes
तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने
Zeeshan kaavish
1 likes
काम मुश्किल था मगर कर जाता ज़ख़्म-ए-दिल मेरा कोई भर जाता सिगरटों ने मुझे बचाया है गर न पीता इन्हें तो मर जाता
Zeeshan kaavish
1 likes
वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता
Zeeshan kaavish
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Zeeshan kaavish.
Similar Moods
More moods that pair well with Zeeshan kaavish's sher.







