तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जाएगा
Bashir Badr
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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई
Mumtaz Naseem
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तेरी गली को छोड़ के पागल नहीं गया रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया मजनूँ की तरह छोड़ा नहीं मैं ने शहर को या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
Ismail Raaz
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सब सेे बेज़ार हो गया हूँ मैं ज़ेहनी बीमार हो गया हूँ मैं कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझ में या'नी अख़बार हो गया हूँ मैं
Mehshar Afridi
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वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता
Zeeshan kaavish
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वो ही मुझ को गिराने वाला है जिस को गिरते हुए सँभाला है दिल को पत्थर बनाया था मैं ने उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है
Zeeshan kaavish
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तेरे जुमले तेरे क़िस्से भुला के आज आए हैं तेरी यादों के सारे ख़त जला के आज आए हैं
Zeeshan kaavish
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तीरगी में मत बैठो रौशनी में आ जाओ चाँद का ये अरमाँ है चाँदनी में आ जाओ बेक़रार है ये दिल आप के लिए कब से छोड़ कर झिझक मेरी ज़िंदगी में आ जाओ
Zeeshan kaavish
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उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो
Zeeshan kaavish
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