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तीरगी में मत बैठो रौशनी में आ जाओ चाँद का ये अरमाँ है चाँदनी में आ जाओ बेक़रार है ये दिल आप के लिए कब से छोड़ कर झिझक मेरी ज़िंदगी में आ जाओ

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वो ही मुझ को गिराने वाला है जिस को गिरते हुए सँभाला है दिल को पत्थर बनाया था मैं ने उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है

Zeeshan kaavish

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वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता

Zeeshan kaavish

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उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो

Zeeshan kaavish

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तेरी यादों से गुज़रने के लिए ज़िंदा रहता हूँ मैं मरने के लिए

Zeeshan kaavish

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तुझ सेे बिछडूँगा तो पागल नहीं होने वाला हाँ मगर सच है मुकम्मल नहीं होने वाला कोई नुक़सान नहीं होगा उसे पाने में वो खरा सोना है पीतल नहीं होने वाला

Zeeshan kaavish

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