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तेरे जुमले तेरे क़िस्से भुला के आज आए हैं तेरी यादों के सारे ख़त जला के आज आए हैं

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वो ही मुझ को गिराने वाला है जिस को गिरते हुए सँभाला है दिल को पत्थर बनाया था मैं ने उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है

Zeeshan kaavish

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वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता

Zeeshan kaavish

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तुझ सेे बिछडूँगा तो पागल नहीं होने वाला हाँ मगर सच है मुकम्मल नहीं होने वाला कोई नुक़सान नहीं होगा उसे पाने में वो खरा सोना है पीतल नहीं होने वाला

Zeeshan kaavish

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उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो

Zeeshan kaavish

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हम ने वतन के वास्ते क्या ख़ूब लिख दिया हम ने वतन को अपना ही महबूब लिख दिया

Zeeshan kaavish

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