मुझ में सात समुंदर शोर मचाते हैं एक ख़याल ने दहशत फैला रक्खी है
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये ख़ामुशी का ज़हर नसों में उतर न जाए आवाज़ की शिकस्त गवारा न कर अभी
Saqi Faruqi
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ये क्या तिलिस्म है क्यूँँ रात भर सिसकता हूँ वो कौन है जो दियों में जला रहा है मुझे
Saqi Faruqi
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दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल ऐ रौशनी-फ़रोश अँधेरा न कर अभी
Saqi Faruqi
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मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते
Saqi Faruqi
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मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली
Saqi Faruqi
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