मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारा-गर ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
Shakeel Badayuni
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मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया
Shakeel Badayuni
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बे-क़रार कर के हमें यूँँ न जाइए आप को हमारी क़सम लौट आइए
Shakeel Badayuni
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दूर हूँ लेकिन बता सकता हूँ उन की बज़्म में क्या हुआ क्या हो रहा है और क्या होने को है
Shakeel Badayuni
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वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं मगर बात करने को जी चाहता है जहाँ इश्क़ में डूब कर रह गए हैं वहीं फिर उभरने को जी चाहता है
Shakeel Badayuni
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