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मुझे मिलने को आई है बड़े दिन बा'द बेचारी हॅंसी है खिल खिलाई है बड़े दिन बा'द बेचारी मेरी बंजर ज़मीं पे वो बनी सरसों सुनहरी सी भरी पूरी उग आई है बड़े दिन बा'द बेचारी

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कहो क्या हो गया जो मिल न पाए यार से अपने निहारो चाँद को फिर यार के घर द्वार को देखो

nakul kumar

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कुछ नहीं है ज़िंदगी बर्बाद है अब तो मर गया हूँ मैं मुहब्बत को मनाने में कैसे भी गर हो सके मुझ को रिहा कर दे रह नहीं सकता मैं अब इस क़ैद-ख़ाने में

nakul kumar

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जी भर गया है अब तो जी भर चाहने वालों से भाग रहा हूँ मैं भी मुझ सेे भागने वालों से

nakul kumar

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इन्हीं पिछले दिनों से कुछ मुझे इस बात का ग़म है अगर मैं रो रहा हूँ तो तिरी क्यूँँ आँख पुर-नम है तिरी तस्वीर है ये रात है बारिश है बादल भी मगर फिर भी न जाने क्यूँँ यहाँ कुछ तो अभी कम है

nakul kumar

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हर बार मुझे हर साँस मिरी इक बात यही समझाती है कुछ काम करो कुछ नाम करो ये उम्र निकलती जाती है मैं कहता हूँ कि समझो तो कोई बात नहीं ऐसी लेकिन इस दुनिया में शोहरत की हवस मुझे अंदर से खा जाती है

nakul kumar

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