मुझ सेे अब दूर भागती हो तुम दिल किसी और को देकर आ गई क्या दी पलट हड़बड़ा के तुम ने बात कुछ ग़लत बात लब पर आ गई क्या
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज
Amaan mirza
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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद
Amaan mirza
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बड़ी मुश्क़िल से मियाँ मिलती है इक आसानी लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को
Amaan mirza
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होते हैं जो ख़ुदा के नेक बंदों में शामिल वो यक़ीनन नहीं हो सकते आप जैसे लोग
Amaan mirza
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मुशायरे का ये भी इक उसूल होना था कम अज़ कम आज का दिन तो फिज़ूल होना था जिस इत्मीनान से मैं ने तुम्हें सुना है दोस्त बस उतना वक़्त मुझे भी वसूल होना था
Amaan mirza
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