मूल्य एक से चार किया है फूलों का यूँँ महँगा बाज़ार किया है फूलों का तुम क्या जानो पीड़ा बेबस तितली की तुम ने तो व्यापार किया है फूलों का
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मिला दे कोई ऐसे ज्योतिषी से मिटाए दोष जो भी कुंडली से जो राजा हो महल स्वीकार ले वो मैं जोगी हूँ मुझे मतलब कुटी से
Jatin shukla
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प्राण को देह से दूरी दे देगा कल राज्य धर्म ऐसी मजबूरी दे देगा कल एक धोबी ने अपराध तय कर दिया एक राजा भी मंज़ूरी दे देगा कल
Jatin shukla
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गुलशन से ही दूर करोगे फूलों को या'नी चकनाचूर करोगे फूलों को तितली से बिछड़ेंगे तो मर जाएँगे क्यूँ इतना मज़बूर करोगे फूलों को
Jatin shukla
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वर्ना तोहफ़े दिल्ली भेजे जाते पर चूड़ी का अपमान नहीं कर सकता मैं
Jatin shukla
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ज़रूरत हुक्म तो देती नहीं पर थकावट शाम को घर खींच लाती
Jatin shukla
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