'मुनव्वर' जा चुके हो तुम हमें क्यूँ अलविदा कह कर यहाँ माँ के लिए अब शे'र बोलो कौन लिक्खेगा
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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याद मुझ को उस ने इतना कर लिया हिचकियों से साँस मेरी रुक गई
Raja Singh 'Kaabil'
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ये कमीने वक़्त पर वापस नहीं देते दोस्तों को तुम कभी पैसे नहीं देना
Raja Singh 'Kaabil'
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तू ख़ुश है या कोई दिक़्क़त है तुझ को तेरी पूरी ख़बर लाया करेंगे तेरी ससुराल में बन कर भिखारी तुझे हम देखने आया करेंगे
Raja Singh 'Kaabil'
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रंग तेरे गाल पर जब से लगाया है ये हमारे हाथ तब से कँपकँपाते हैं
Raja Singh 'Kaabil'
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कहाँ मशहूर होते आज ये क़िस्से अगर मजनूँ को लैला मिल गई होती
Raja Singh 'Kaabil'
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