रंग तेरे गाल पर जब से लगाया है ये हमारे हाथ तब से कँपकँपाते हैं
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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गाली को प्रणाम समझना पड़ता है मधुशाला को धाम समझना पड़ता है आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में रावण को भी राम समझना पड़ता है
Azhar Iqbal
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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याद मुझ को उस ने इतना कर लिया हिचकियों से साँस मेरी रुक गई
Raja Singh 'Kaabil'
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ये कमीने वक़्त पर वापस नहीं देते दोस्तों को तुम कभी पैसे नहीं देना
Raja Singh 'Kaabil'
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तुम रखो बंदूक़ मेरे सर पे लेकिन मैं सनम लव यूँ तुम्हें कह कर रहूँगा
Raja Singh 'Kaabil'
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'मुनव्वर' जा चुके हो तुम हमें क्यूँ अलविदा कह कर यहाँ माँ के लिए अब शे'र बोलो कौन लिक्खेगा
Raja Singh 'Kaabil'
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जीभ जैसे है पहुँचती एक हिलते दाँत पर उस तरह ही याद मुझ तक है पहुँच जाती तेरी
Raja Singh 'Kaabil'
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