मुसाहिब ने मोहब्बत लिख दिया बारिश के होने पर न जाने किस सड़क मुफ़लिस गया ढह घुप्प कोने पर
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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ज़रा पेड़ को और सूखा बना दूँ गरजते दिखा मेघ भूखा बना दूँ
Subhadeep Chattapadhay
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रह गया इस ज़मीं में कहीं तन्हा मैं थे मरे तुम कहाँ वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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मेरे दर खड़े क्यूँँ है साथी सभी मेरे मरने की ये ख़बर किस ने दी
Subhadeep Chattapadhay
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जल गए वो सभी जिन को थी इक ज़बाँ मैं ही क्यूँ बच गया वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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आँख में तिरे जो ये हमेशा चेहरा दिखता है मेरा था नहीं कभी वो और ही किसी का है
Subhadeep Chattapadhay
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