जल गए वो सभी जिन को थी इक ज़बाँ मैं ही क्यूँ बच गया वो मुझे बोल दो
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ज़रा पेड़ को और सूखा बना दूँ गरजते दिखा मेघ भूखा बना दूँ
Subhadeep Chattapadhay
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रह गया इस ज़मीं में कहीं तन्हा मैं थे मरे तुम कहाँ वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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मेरे दर खड़े क्यूँँ है साथी सभी मेरे मरने की ये ख़बर किस ने दी
Subhadeep Chattapadhay
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धर्म अब कट चुका इस जहाँ में तुम ने ही तो उसे काटा हर दिन
Subhadeep Chattapadhay
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आँख में तिरे जो ये हमेशा चेहरा दिखता है मेरा था नहीं कभी वो और ही किसी का है
Subhadeep Chattapadhay
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