धर्म अब कट चुका इस जहाँ में तुम ने ही तो उसे काटा हर दिन
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ज़रा पेड़ को और सूखा बना दूँ गरजते दिखा मेघ भूखा बना दूँ
Subhadeep Chattapadhay
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मेरे दर खड़े क्यूँँ है साथी सभी मेरे मरने की ये ख़बर किस ने दी
Subhadeep Chattapadhay
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रह गया इस ज़मीं में कहीं तन्हा मैं थे मरे तुम कहाँ वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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जल गए वो सभी जिन को थी इक ज़बाँ मैं ही क्यूँ बच गया वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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मुसाहिब ने मोहब्बत लिख दिया बारिश के होने पर न जाने किस सड़क मुफ़लिस गया ढह घुप्प कोने पर
Subhadeep Chattapadhay
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