ज़रा पेड़ को और सूखा बना दूँ गरजते दिखा मेघ भूखा बना दूँ
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं पेड़ का रूप धार लूँगा मैं तू निशाने पे आ भी जाए अगर कौन सा तीर मार लूँगा मैं
Tehzeeb Hafi
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
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शतक बनाने को बस एक रन बनाना है वो दोस्त बन गई है अब दुल्हन बनाना है
Charagh Sharma
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अपने दिल में बसाओगे हम को और गले से लगाओगे हम को हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल तुम तो पागल बनाओगे हम को
Abrar Kashif
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रह गया इस ज़मीं में कहीं तन्हा मैं थे मरे तुम कहाँ वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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मेरे दर खड़े क्यूँँ है साथी सभी मेरे मरने की ये ख़बर किस ने दी
Subhadeep Chattapadhay
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आँख में तिरे जो ये हमेशा चेहरा दिखता है मेरा था नहीं कभी वो और ही किसी का है
Subhadeep Chattapadhay
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जल गए वो सभी जिन को थी इक ज़बाँ मैं ही क्यूँ बच गया वो मुझे बोल दो
Subhadeep Chattapadhay
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धर्म अब कट चुका इस जहाँ में तुम ने ही तो उसे काटा हर दिन
Subhadeep Chattapadhay
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