मुस्कुरा के तू गर पिलाए तो एक क़तरा फ़ुरात है साक़ी
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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया
Zubair Ali Tabish
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सफ़र से लौट जाना चाहता है परिंदा आशियाना चाहता है कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
Shakeel Jamali
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हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया
Jigar Moradabadi
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कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया
Vivek Bijnori
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हमारी मुस्कुराहट पर न जाना दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है
Aanis Moin
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महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है सिंदूर तेरी माँग का उल्फ़त का नाम है
Parvez Zaami
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कहते हैं लोग जिस को सनम बादा-ए-इरम वो तो तिरे लबों की हलावत का नाम है
Parvez Zaami
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जिन की मंज़िल गुलाब होती है उन की राहों में ख़ार होते हैं
Parvez Zaami
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शे'र अपने मक़ाम तक जाते आप गर मुस्कुरा दिए होते
Parvez Zaami
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जब तलक सूरज को ग्रहण लगे 'ज़ामी' चाँद का क़िस्सा सुनाओ अँधेरा है
Parvez Zaami
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