न खाओ क़स में वग़ैरा न अश्क ज़ाया' करो तुम्हें पता है मेरी जान हक़-पज़ीर हूँ मैं
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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शिकवा करने वाले और कितनी तवज्जोह दूँ तुझे मैं तेरी चुप सुन रहा हूँ इतनी आवाज़ों के बीच
Amaan Haider
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तू देख लेना तिरी रुख़्सती के बा'द में हम लिबास-ए-सोग में घू मेंगे तेरी गलियों में
Amaan Haider
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मेरी तन्हाई की ग़िज़ा मत पूछ ख़ून पीती है जान खाती है
Amaan Haider
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जिस का दीवाना बना फिरता है ये शहर का शहर दोस्त वो शख़्स मुझे इतना भी अच्छा न लगा
Amaan Haider
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इख़्तियार इस लिए दोनों ने ख़मोशी करली गुफ़्तगू नफ़्स की तौहीन तलक आ गई थी
Amaan Haider
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