न सहम कर न डर के छोड़ता है हंस तालाब मर के छोड़ता है वक़्त बर्बाद करने वालों को वक़्त, बर्बाद कर के छोड़ता है
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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
Nadeem Farrukh
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मत से तिरे सहमत न हो सरकार हिन्दुस्तान में मत दान कर फिर अपना मत ऐसे किसी मतदान में
nakul kumar
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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उस ने छोड़ा है मुझे छोड़ते हैं जैसे लोग बाढ़ के वक़्त सभी ग़ैर ज़रूरी सामान
Vishnu virat
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आज पलटे जो ख़्बाब के पन्ने मैं ने दिल की किताब के पन्ने वक़्त ने देख मोड़ रक्खे हैं तेरे हुस्नो शबाब के पन्ने
Sandeep Thakur
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गिफ़्ट कर देता हूँ उस को मैं किताबें, लेकिन उन को पढ़ लेने की मोहलत नहीं देता उस को
Harman Dinesh
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हम ने ग़ज़लों में हुक़ूमत को लिखी है 'लानत धमकियाँ आती हैं, इन'आम तो आने से रहा
Harman Dinesh
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यूँँ तो सर्कस में हम बहुत ख़ुश हैं फिर भी जंगल तो यार जंगल था
Harman Dinesh
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मैं खोया खोया सा तेरी छत की जानिब देख रहा हूँ गीले कपड़े सूख रहे हैं, सूखी आँखें भीग रही हैं
Harman Dinesh
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उस को राँझा मत कहो, जो ना हुआ फ़क़ीर जो ना जोगन हो सकी, सो काहे की हीर!
Harman Dinesh
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