sherKuch Alfaaz

नाम वैसे ग़ुलाम मेरा था शाह की पर ग़ुलाम रानी थी

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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है

Tehzeeb Hafi

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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने

Zia Mazkoor

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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था

Adeem Hashmi

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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है

Zubair Ali Tabish

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नई फ़स्लों को ये कुछ और से कुछ और करते हैं गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूॅंढ़ते हैं रातरानी में

nakul kumar

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